सालों के इंतज़ार के बाद आखिरकार iPhone यूज़र्स के लिए अच्छी खबर आती दिख रही है। Mark Gurman की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक Apple Pay अक्टूबर 2026 में भारत में लॉन्च हो सकता है। हालांकि शुरुआत में इसमें एक बड़ी कमी रह सकती है और वो है UPI का सपोर्ट ना होना।
Samsung Pay और Google Pay जैसे वॉलेट ऑप्शन भारत में काफी समय से मौजूद हैं। अब भारत में iPhone यूज़र्स की बढ़ती संख्या को देखते हुए ऐसा लगता है कि Apple को इस मार्केट में अपनी सर्विसेज़ का दायरा बढ़ाने का सही मौका दिख रहा है।
अक्टूबर में लॉन्च की चर्चा
Apple Pay के भारत आने की तैयारी कई महीनों से चल रही बताई जा रही है। Apple की खबरों के लिए भरोसेमंद माने जाने वाले Mark Gurman ने हाल ही में दावा किया कि कंपनी अक्टूबर में यह पेमेंट सर्विस भारत में शुरू करने की योजना बना रही है। इससे पहले अगस्त में Business Standard की एक रिपोर्ट ने भी ऐसी ही टाइमलाइन का संकेत दिया था, जिसमें कहा गया था कि सर्विस सितंबर के आखिर या अक्टूबर में आ सकती है।
बैंकों से बातचीत जारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple, Axis Bank, HDFC Bank और ICICI Bank जैसे भारतीय बैंकों के साथ-साथ Visa और Mastercard से भी बात कर रही है, ताकि इस सर्विस के ज़रिए कार्ड पेमेंट शुरू किए जा सकें। Reuters की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि Axis Bank, Apple का पहला बैंकिंग पार्टनर बन सकता है, जबकि HDFC Bank और ICICI Bank के साथ चर्चा अभी जारी है।
भारत क्यों बना Apple के लिए सही मार्केट?
भारतीय यूज़र बेस में Apple तेज़ी से बढ़ रहा है। प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में कंपनी का दबदबा है, और भारत उन गिने-चुने बड़े बाज़ारों में से है जहां Apple Pay अब तक उपलब्ध नहीं है। Apple ने 2017 में ही भारत में यह सर्विस लाने की इच्छा जताई थी, लेकिन रेगुलेटरी और टेक्निकल अड़चनों की वजह से योजना टलती रही।
UPI के बिना हो सकती है शुरुआत
इस लॉन्च की सबसे बड़ी कमी यह हो सकती है कि Apple Pay में शुरुआत में UPI नहीं मिलेगा। मौजूदा रिपोर्ट्स के अनुसार, Apple पहले Visa और Mastercard क्रेडिट कार्ड्स पर फोकस करेगा। यूज़र्स अपने सपोर्टेड कार्ड्स को Apple Wallet में जोड़कर iPhone या Apple Watch से कॉन्टैक्टलेस पेमेंट कर पाएंगे।
UPI सपोर्ट शुरुआत में आने की उम्मीद कम है, क्योंकि इसके लिए Apple को NPCI की मंज़ूरी और स्पॉन्सर बैंक की व्यवस्था चाहिए होगी।
ट्रांज़ैक्शन फीस पर फंसा है पेच
रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple हर कार्ड ट्रांज़ैक्शन पर करीब 15 से 20 बेसिस पॉइंट्स की फीस मांग रहा है, जबकि कुछ बैंक लगभग 10 बेसिस पॉइंट्स पर अड़े हैं। एक बेसिस पॉइंट 0.01 प्रतिशत के बराबर होता है। बताया जा रहा है कि यह फीस बैंकों की इंटरचेंज कमाई से जाएगी, यानी यूज़र्स से सीधे नहीं वसूली जाएगी।
भारत में यह मॉडल जायज़ ठहराना आसान नहीं होगा, क्योंकि यहां UPI आमतौर पर ज़्यादातर रोज़मर्रा के ट्रांज़ैक्शन पर बिना मर्चेंट डिस्काउंट फीस के चलता है। हालांकि 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ऊपर के योग्य मर्चेंट UPI ट्रांज़ैक्शन पर 0.4 प्रतिशत फीस लागू होगी। छोटे मर्चेंट पेमेंट और पर्सन-टू-पर्सन ट्रांसफर इससे बाहर रहेंगे।
Samsung Wallet से कितना पीछे रहेगा Apple Pay?
Apple को ऐसे बाज़ार में उतरना है जहां Samsung पहले से Samsung Wallet के ज़रिए काफी पूरी पेमेंट सर्विस दे रहा है। Samsung का वॉलेट NFC-बेस्ड कार्ड पेमेंट के साथ-साथ UPI को भी सपोर्ट करता है, जिसमें QR कोड पेमेंट, मनी ट्रांसफर और पेमेंट रिक्वेस्ट शामिल हैं।
यानी एक ही वॉलेट में कार्ड और UPI दोनों तरह के पेमेंट हो जाते हैं, जो भारतीय यूज़र्स के लिए बड़ा फायदा है। इसके मुकाबले Apple की शुरुआती सर्विस ज़्यादातर उन iPhone और Apple Watch यूज़र्स को पसंद आएगी जो कॉन्टैक्टलेस पेमेंट के लिए नियमित रूप से क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं। जो लोग रोज़ QR कोड से UPI पेमेंट करते हैं, उन्हें फिर भी दूसरे ऐप की ज़रूरत पड़ेगी।






